बिल्ली की अकल — बाल गीत

बिल्ली की अकल — बाल गीत

ढूँढ़ो साथियों बोली बिल्ली
मेरी अकल की किल्ली
गिरी यहीं थी ढीली होकर
मेरी अकल की किल्ली

गर न मिले तो चुप ही रहना
वरना होगी खिल्ली
लोग हँसेंगे, ताने कसेंगे
है बिन अकल की बिल्ली

मिले अगर तो भी कुछ न कहना
वरना होगी खिल्ली
लोग हँसेंगे, ताने कसेंगे
इसकी अकल थी ढ़ीली।

—– —- भूपेन्द्र कुमार दवे

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