विरह की आग

जब से तूने मेरी जिंदगी से किनारा कर लिया है ,
तेरी याद में मेरी आँखों ने रोना सीख लिया है |
धड़कन आज भी तुम्हारा नाम पुकारती है ,
पर तुम नहीं सुन रहे हो , ये भी जानती है |
तरस जाती है नज़रे तुम्हारे दीदार को ,
मयस्सर इन्हे वो नजारा नहीं है ,
इक हसीं ख्वाब की तरह भूल जाने को मन तो बहुत करता है ,
पर इन आँखों को आंसुओ से फुसरत ही कहाँ है |
कमी थी कोई प्यार में तो कभी शिकवा किया तो होता ,
जान लगा देते उस कमी को दूर करने में ,
उम्मीद आज भी है की तुम वापस आओगे ,
दिल की इस सच्ची मोहब्बत को समझ पाओगे |
दूर रहकर हमसे सुकून तो तुम्हे भी नहीं है ,
जुदाई का दर्द तो तुम्हारे दिल में भी है ,
मेरी आँखों को आज भी इंतजार है तुम्हारा ,
दिलो में जिन्दा है प्यार आज भी हमारा |

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