जीवन-पथ

सच्चे पथ पर चलने वाला
आगे बढता जाता है
फूल बन महक फैलाता है
जहा शूल से टकराता है

क्षण-प्रतिक्षण अग्रसर होना ही
इनसान का मौलिक कर्म है
जन कल्याण के प्रति आस्था और
मानवता सबसे बडा धर्म है

संघर्ष और श्रम दोनों ही
सारथी जीवन रथ के है
मंजिल खूबसूरत ही होगी
द्रुश्य भले कंटिले पथ के है

मनिष्य एक सामाजिक प्राणी
जीना इसे समाज मे है
कल के लिए लिखे एक सुनहरा अध्याय
खामिया भले आज मे है

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