हमारा राजस्थान

भारत रो इक हिस्सों प्यारो ,
नाच अठे रो घूमर प्यारो ,
पश्चिम दिशा रे माय पधारो ,
रंग बिरंगी धरती ऊपर रेत बेकला साजे है ,
चहक उठे सूखी धरती जद आकाश में बादळ गाजे है ,
शूरवीर राणा प्रताप ने इ धरती पर सौगंध खायी ही ,
युद्ध में लड़कर अपनी धरती री लाज बचायी ही ,
खानपीन रो देशीपणो पकवाना ने दूर बिठावे है ,
मनमोहक सी संस्कृति सुरगा सू भेंट करावे है ,
लोग अठे गा ,
मेल जोल और भाईचारा सू इक दूजे रो साथ निभावे है ,
रल मिल ग सगळा ही सागे तीज त्यौहार मनावे है ,
माटी रा टीला घणा बड़ा पर्यटका न लुभावे है ,
ऊँठ री सवारी खातिर दूर दूर सू आवे है |

2 Comments

  1. RAM 24/01/2015
    • कुमार मंगल कुमार मंगल 25/01/2015

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