इंतजार किसका है।”गजल”

उनको खबर नहीं है की आँखों में प्यार किसका है?
मेरे दिलो-दिमाग में छाया ये खुमार किसका है?
इक दीद की चाहत में मुद्दत गुजार दी
फिर भी पूछते हैं वो की इंतजार किसका है?

इस राह में ये नजरें उनको तलाशती हैं।
हल्की सी कोई आहट होती तो झांकती हैं।
शायद हवा का झोंका पैगाम ले के आया
कानों में कह गया वो करार किसका है।
उनको खबर नहीं है की आँखों में प्यार किसका है?

वो आई न अब तक,मेरे आईने के पास।
खुद भी उदास होगी वो करके मुझे उदास।
आँखे खुली रहेंगी मेरी, मरने के बाद भी
चर्चा-ऐ -आम होगी ये तलबगार किसका है?
उनको खबर नहीं है की आँखों में प्यार किसका है?

तोड़ोगे आईना कभी आंसू बहाओगे।
इश्क जब दम तोड़ देगा तब क्या खाक आओगे।
चले आना मेरी कब्र पे रौशनी करने
फिर सोचना की मिट गया संसार किसका है?
उनको खबर नहीं है की आँखों में प्यार किसका है?

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