आओ फिर से दीप जलाए

नव उमंग, नव उत्साह संग
जीवन मे सजा प्रेम के रंग
इस चमन की खुशबू को जन-मन मे फैलाए
आओ फिर से दीप जलाए!!

अनंत धरोहर है हमारी विरासत
इन्हें उत्कर्ष तक ले जाने की चाहत
कदम दर कदम अग्रसर होते जाए
आओ फिर से दीप जलाए!!

हाथों मे हाथ, एकता का संकल्प कर
दुशित विचार-धाराओं का कायाकल्प कर
मानवता के अध्याय सीखें, सीखाए
आओ फिर से दीप जलाए!!

निज मुख दर्पण मे देख समाज निर्माण हो
अतीत से सीख , दूरद्रुष्टि अपना आज निर्माण हो
सुखद समाज की कल्पना साकार करने मे जुट जाए
आओ फिर से दीप जलाए!!

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