एक कलाकर हो जाता है

प्रेम-पुष्प के हृदय में
छिपा स्वर्ण भाग को
आभास करने वाला
एक कलाकर हो जाता है
वो कवि या दार्शनिक
भी हो सकता है

– नीरज सारंग

Leave a Reply