करप्शन

ये चिंता नहीं चिताएँ हैं .
देश में अनेक समस्याएँ हैं.
जिसका मुँह काला और कैरेक्टर है ढीला -ढाला,
हर तरफ है उस करप्शन का बोल-बाला.
जिसने देश का निकाला दिवाला,
सिस्टम को हिला डाला,
छीना जिसने मुँह से निवाला,
ईमान की नीव हिला डाला,
हर तरफ है उस करप्शन का बोल-बाला.
बर्थ या डेथ सर्टिफिकेट हो बनाना,
चलता नहीं कोई बहाना,
पड़ता है ज़्यादा कीमत चुकाना,
दफ्तर में चाहिए प्रमोशन या स्कूलों में एड्मिशन ,
तो देनी होगी डोनेशन.
अस्पताल हो या शमशान हर जगह लगती है कमीशन.
बैंको से चाहिए लोन या लगाना हो टेलीफोन,
बच सका है इससे कौन ?
खेलों में फिक्सिंग या रेलों में टिकटिंग,
हर जगह है सेटिंग.
एग्जामिनेशन हो या इलेक्शन,
हर तरफ है करप्शन.
डाला है इसने मजबूरी का फंदा,
जिससे परेशान है हर बन्दा,
जिसने जीवन में ज़हर घोल डाला,
इंसान की फिरत ही बदल डाला,
हर तरफ है उस करप्शन का बोल-बाला .
जिसने समाज का बेड़ा गर्क कर डाला
हमीने उसे पला,
हर तरफ है उस करप्शन का बोल – बाला.

* मो. जुनैद अहमद *

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