गर्म होता समय और हम

अभी समय के भंडार में
ब्लैकहोल होने की बात
सुगबुगाहट तक सीमित नहीं है
और ना ही बची है
कोई ओजोन
समय के गर्भ में.

आज समय का नाप-तौल
मापने की सारी शक्ति
उदारवाद के चमकते फर्श पर
सिसकने को विवश है
और कामना के हर कदम पर
बिछने को आतुर
वे सारी संभावनाएं
धीरे से
सुगबुगाहट बनती जा रही है.

अभी और अभी
एक चिड़िया
स्याह घोसले को
ढूंढने में व्यस्त है
और कई चमगादड़
अपने पेड़ों को छोड़ चुके हैं.

उधर एक बादल का टुकड़ा
चाँद की ओर
चुपके से पाँव पसार रहा है
इधर ढिबरी के मद्धिम रौशनी में
इस चौपाल के उस कोने में
चार जने सुगबुगाहट की आंच में
धीरे-धीरे गर्म हो रहे हैं.

यदि हम काँटों को
कांटें से निकालने की बात छोड़ भी दें
तो भी बड़ी लाइन को
छोटी करने की बात
हम साथ लिए
इस विकट समय में ही जायेंगे
जहाँ ओजोन
और ब्लैकहोल की बात
समय के गर्भ में
अभी बेईमानी लगती है
जब हमारा आकाश
रक्तिम होकर
हमारे आँगन में पसरा है |

2 Comments

  1. Bhulu Prasad 22/01/2015

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