अगर दहेज न होता

अगर दहेज न होता तो क्या होता।।

न ससुराल में लालच होता
न मायका बेबस होता
न बेटी जलती आग में
न बाप पर कर्ज होता
अगर दहाज न होता तो क्या होता।।

एक शगुन की रस्म को
समाज के ठेकेदारों ने दहेज बना डाला
आज फिर लालच ने
लाचारी का मजाक उडा डाला
यह देखकर दिल आज भी है रोता
अगर दहेज न होता तो क्या होता।।

आओ मिलकर प्रण उठायें
समाज को हम दहेज मुक्त बनायें
फिर देखना तुम ‘श्रवण’
परिवर्तन समाज में कैसा है होता
अगर दहेज न होता तो क्या होता।।

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  1. gurpreet singh 19/01/2015

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