एक सा लगा

कई दिनों बाद
बादलों से सूरज का झांकना
महीनों बाद
किसी उदास चहरे का मुस्कुराना
बंद द्वार खोल कर
चुपके से तुम्हारा अंदर आजाना
एक सा लगा

वीरान जंगल में
किसी पंछी का चहचहाना
पतझड़ के बाद कोयल का
वसंत को बुलाना
खुले आँगन में बैठ
तुम्हारा अकेले गाना
एक सा लगा

पौ फटते ही
कली का पंखुड़ी बन जाना
पवन के झोंकों से
खेत का लहलहाना
नींद के बाद
अंगड़ाई लेकर
तुम्हारा उठ जाना
एक सा लगा

लल्लन प्रसाद
(भीड़ की आँखें ,स्टार पब्लिकेशंन्स (प्रा). लि)

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  1. bimladhillon 19/01/2015

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