पृथ्वी इतना दुःखी क्यूँ है

” यदि सिंधु-जल धरती के अश्रु हैं
और उसके हृदय में ज्वालामुखी
तो मैं नहीं जनता हूँ
पृथ्वी इतना दुःखी क्यूँ है ”

– नीरज सारंग

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