अरमान

हे भारत माता !
है मेरे दिल का ये अरमान,
काश मैं भी होता सेना का जवान.
हम करते हैं तुझसे दिलों-जां से प्यार,
गर काम न आ सका तेरे
तो मेरा जीवन है बेकार
गर करे तेरा कोई अपमान,
हिमालय के समान,
अडिग खड़ा हो जाऊँ
मैं अपना सीना तान .
तेरी ही भक्ति से,
मुझे मिली ये शक्ति है
गर जन्मु सौ बार,हर बार,
हो जाऊँ तुझी पे मैं कुर्बान,
बोल रहा है, ये तेरा अदना सा संतान.
गर मौका मुझे भी मिला होता,
रणभूमि में मै भी अडिग खड़ा होता,
कारगिल के कारनामो में किया है,
जो तेरे वीर सपूतों ने अनोखा काम,
उन शहीदों में होता मेरा पहला नाम.

* मो. जुनैद अहमद *

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