फायदा

अभी तक तो तुम्हें भुलाया नहीं था
मगर फिर ये सोचा याद कर के भी क्या फायदा ?

जमाने में इतनी ताकत कहाँ थी
जो तुम्हें मुझसे यूँ जुदा कर देता |
हमें तो अपनों ने ही दिल से निकला
तो मोहब्बत की बातें बता के क्या फायदा ?

मेरी जगह दूसरा होता तो कहता
जीने दूंगा नहीं चैन से तुमको एक पल |
मगर सीने में तेरे दिल तो मेरा है धड़कता
फिर खुद को ऐसे तड़पाके क्या फायदा ?

अभी तो नहीं मगर सोचोगे एक दिन
साथ मेरा होता तो शितम कम क्या होते ?
छुप जाऊँगा मैं ही तुम्हारी नज़रों से
न मिलूंगा तुम्हें, ढूंढने का क्या फायदा ?

अभी तक तो तुम्हें भुलाया नहीं था
मगर फिर ये सोचा याद कर के भी क्या फायदा ?