साथ का रंग

साथ का रंग
********* -राम शरण महर्जन

प्यार निभाता जब तौल-तौल के
प्यार बिखरा साथ-साथ तब से |

रिश्ता खून के हो या मन के करीव
नफरत भी छोटा होते, मेरा हे करीव |

दिल तो दिल ही होता सबका अपना
किसका है छोटा या बड़ा देखता दूसरा |

जीनेका ढंग अपना साथ होनेका रंग अपना
किसे पत्ता साथ का रंग लगे दाग बने अपना |

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