कौन कहता है अकेले है हम !

एक में अनेक है आप
आपके हाथ में है ऎसी क्षमता
आप जिसको पंचायत का प्रधान बना दे
आप चाहे जिसको बिधायक बना दे
आप चाहे जिसको सांसद बना दे
आप चाहे जिसकी सरकार बना दे
कौन कहता है अकेले है आप
आप में ही अनेक है
बशर्ते आप की सोच में अनेकता हो
अगर गांधीजी अपने आप को अकेला सोचते तो
सारा भारत गांधीजी को नहीं पहचानता
अगर सरदार वल्लभ भाई पटेल ऐसा सोचते तो
आज हमारा भारत अखंड नहीं होता
अगर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ऐसा सोचते तो
भारत की पावन मिटटी पर झंडा नही पहरता
अगर सारे भारतवासी ऐसा सोचते तो
भारत विश्व का सबसे बड़ा गणतांत्रिक देश नहीं कहलाता
हम सब एक में अनेक है
हमारी आत्मा से आवाज निकलती है
हमारा भारत महान है और महान रहेगा
हमारी अनेकता में भारत की एकता है ।
——-प्रेमचंद मुरारका

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