“मेरा बचपन “

रवानी सुनाऊँ वा , जवानी सुनाऊँ|
आज अपने बचपन,की कहानी सुनाऊँ||
वर्ष चार हमने, को नीर ज्यों नापा|
कहाँ तक उसकी , दीवानी सुनाऊँ||
थीं हाथ में पुस्तक ,तैरती थी काया !
पतवार बनकर,कत कहानी सुनाऊँ ||
उ नदी की तलहटी,उफनता रहा पानी !
चढ़ी न जवानी , की कहानी सुनाऊँ ||
थी पढ़ने की ललक,औ चलने को पौरुष!
बचपन की रवानी ,की कहानी सुनाऊँ ||

7 Comments

  1. rakesh 16/01/2015
  2. Sukhmangal Singh sukhmangal 29/05/2015
  3. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 17/12/2015
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/12/2015
    • Sukhmangal Singh sukhmangl 27/07/2016
  5. Rinki Raut Rinki Raut 17/12/2015
    • Sukhmangal Singh sukhmangal 30/04/2016

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