“बचपन”


घूमकर देखा बचपन सायकिल का मिज़ाज !
नाव को ढूँढता खिलता रहा दिल में उल्लास ||
सलवटें पड़ी माथे मगर ढ़ो रहा लेकर अहसास|
जब माता -पिता का मिला था पूरा -पूरा साथ ||
खुशियाँ रहमत -ओ -कर्म हो पकड़ लेतीं हाथ |
‘मंगल’ तुम्हारे हुनर लाए निखार लेखनी साथ||

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