ज़िन्‍दा इंसान हूँ मैं

ज़िन्‍दा इंसान हूँ मैं

सोहबत
चाहिए तुम्‍हारी
मुकम्‍मल

लाश नहीं हूँ
कि
शब्‍दों के फूल

चढ़ाते
चली जाओ…।

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