बन्ध मुक्त कर दे मुझको तु

द्वैत नहीं, अदैत भाव से,
ना शब्द, ना ही संकेत भाव से।

बन्ध मुक्त कर दे मुझको तु ,
रश्मि युक्त कर दे मुझको तु ।

तिमिर मिटा दे अन्तरतम् का,
योग करा दे तु प्रियतम का,
आत्म का सामिप्य करा दे,
अज्ञान रिक्त कर दे मुझको तु ,

दिव्य असंख्य प्रकाश पुंज का,
ज्ञान सुशोभित नवल कुंज का,
विभु प्रभु के पुरा भेद के,
वेद संयुक्त कर दे मुझको तु ,

बन्ध मुक्त कर दे मुझको तु ,
रश्मि युक्त कर दे मुझको तु।

चिर शान्ति के ध्वनित वाक्य से,
ऊँमाक्षर के सृजित साक्ष्य से,
भव एवं भाव से परा वस्तु के,
समर्पित लिप्त कर दे मुझको तु ,
रश्मि युक्त कर दे मुझको तु ।

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