सौ साल की गुङियाँ

मेरा नाम है गुङिया मैं हूं सौ साल की बुङिया
बचपन में सब मुझे गले लगाते थे
मेरी डुमक-डुमक चाल पर इतराते थे
मुझे लोरी बिन चाहे ही सुनाते थे
अब मैं जहाँ बैठ जाती हूँ।
उस जगह को भी, बिन साफ किए लोग अब बैठते नही
मुझसे कूब के कारण अब चला नही जाता
इस बात को लोग अब सहते नही
सबकी दुलारी थी जो वह इस गुङिया
अब किस्मत की मारी है ये बुङिया
मेरा नाम है गुङिया मैं हूँ………………

पहले मैं ही दिलों की रानी थी
मुझसे ही होती सबकी कहानी थी
अब देख कर मुझको लोग मुँह फेर लेते है
अपने ही नही पराएं भी मजा लेते है
जो सुन्दर सलोनी प्यारी थी गुङिया
अब झूरियों के बोझ से भारी है ये बुङियाँ
मेरा नाम है गुङिया मैं हूँ……………

जो माँ-बाप की बहुत दुलारी थी
न जाने प्यार से किस-किस की किस्मत सवारी थी
मैं उस वक्‍त की जानी मानी थी
अब उस पल को याद करना शायद बेमानी थी
सुन्दर शरीर से फली-फूली थी वह गुङिया
दर्द से धूलि हुई है ये बुङिया
मेरा नाम है गुङिया मैं हूँ……………

अब हर दम अकेली होती हूँ
अपने उस चरित्र को याद करती हूँ
जो तमाम उम्र की निभाया है
वो ही मेरे जीवन में फरियाद बनकर आया है
न सताना कभी किसी को न जाने कब वक्‍त निकल जाएँ
एक दिन वक्‍त सबका बूढा होगा
ऐसा न हो सौ साल की बुङिया तुम्हारे चेहरे पर भी मुस्काए
मेरा नाम है गुङिया मैं हूँ ……………….

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