चुप हो तुम

चुप हो तुम
तो
हवाएं चुप हैं

खामोशी की चील
काटती है
चक्कर
दाएं… बाएं

लगाती हूं आवाज…

पर
फर्क नहीं पड़ता

बदहवासी

पैठती जाती है
भीतर…

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