//ऐसी सुन्दर रचना हो //

जिसे पढ़कर मन कुंदन हो,
अटुट बंधन हो,
सारा जीवन धन्य हो,
ऐसी सुन्दर रचना हो ……

जिसमे…
प्रेरणा,
उत्साह,
साहस,
करुणा,
प्रेम,
धैर्य,
आशा,
विश्वास,
ईमानदारी,
कड़वी सच्चाई,
अनंत खुशिया हो,
ऐसी सुन्दर रचना हो ……

नई सूर्य,
नई सुबह,
नई चन्द्रमा,
नई संध्या,
नई जीवन हो,
ऐसी सुन्दर रचना हो……..

भाईचारा ,
सच्ची मित्रता,
माँ की ममता,
बाप का फ़र्ज़,
बहन की प्यार,
हर रिश्तो की अहमियत हो,
ऐसी सुन्दर रचना हो ……….

कलियुग में सिया हो,
खुश्बु कुसुम की हो,
आसमा में रेवती हो,
हर रोज लेखनी में
दुष्यंत के जीवन में
सौरभ,
कुंदन,
चन्दन हो,
ऐसी सुन्दर रचना हो…..

बुराई को लड़ सके
ऐसी अपार शक्ति हो,
लोगो के
मन,
दिल में श्रद्धा भक्ति हो,
सारा जहां में शांति हो
ऐसी सुन्दर रचना हो……

मिट न सके इतिहास,
कवि की लेखनी
इतनी प्रखर हो,

मन गंगा सी निर्मल हो,
मंगल-मंगल हो,
ऐसी सुन्दर रचना हो .

@@@ दुष्यंत पटेल @@@

One Response

  1. rakesh 16/01/2015

Leave a Reply