कर्म रथ

किंचित ना कर संताप मनुज तू,
जीवन है एक दुर्गम पथ |
साहस और धीरज का संग ले,
तू बढ़ चल कर्म के रथ पर ||

एक पल ना विश्राम कही पर,
ना मंद हो गति तेरी |
कालचर्क भी हो अचंभित ,
देख तेरे रथ की गति ||

—– कवि कौशिक

Leave a Reply