अग्निस्नान

आज बहुत खुश थी कान्ता रानी ;
उसकी बिटिया रेखा हो गयी सयानी ।
कर दी शुरु रिश्ते की तलाश ;
एक अच्छा रिश्ता आया उनके पास ।
जांच की पङताल करायी ;
कोई कमी ना सामने आयी ।
लडके वाले थे अमीर बडे ;
कान्ता को गहने गिरवी रखने पडे ।
फिर आयी दहेज की बारी ;
धरी रह गयी सारी तैयारी ।
लडका बोला गाडी चाहिये ;
शादी से भी पहले चाहिये ।
गरीब मां बाप ने हां कर दी ;
अपनी बाकी जमीन भी गिरवी रख दी ।
शादी हो गयी धूम धाम से ;
रेखा चली गयी अपने गांव से ।
फिर लडके वाले बार बार पैसो की मांग करने लगे ;
रेखा को भी वो परेशान करने लगे ।
रेखा रहने लगी परेशान ;
खुद को करना चाहती थी बेजान ;
कर लिया उसने अग्निस्नान ।
आओ आज हम एक प्रण ले ;
किसी कि बेटी फेर ना जले ।

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