सुधि मोरी काहे बिसराई नाथ /शिवदीन राम जोशी

सुधि मारी काहे बिसराई नाथ ।
बहुत भये दिन तड़फत हमको, तड़फ तड़फ तड़फात ।
अब तो आन उबारो नैया, अपने कर गहो हाथ ।
अवगुन हम में, सब गुन तुम में, फिर काहे ठुकरात ।
हम जो पूत कपूत हैं तेरे, तुम हमरे पितु मात ।
नयन नीर भर आये हमरे, बरषा ज्यो बरसात ।
तुम बिन हमरी कौन खबर ले, दिन सब बीते जात ।
अपने को अपना कर राखो, कबहूं ना छांड़ो साथ ।
शिवदीन तुम्हारा गुण नित गावे, उठत ही परभात

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