ऐसा क्यों होता है ?

ऐसा क्यों होता है ?

दादी,
माँ, और बहु,
तीनो का जीवन
अपने-अपने,
समय की
समरूप,
अभिनय,
जीवन शैली,
की है व्यतीत,
फिर भी,
होकर,
एक ही कश्ती,
के आरोही,
विषयनिष्ठ,
लक्ष्य,
समानांतर…!
पर जाने क्यों,
रखते सदैव
एक दूजे के विपरीत
विचारधारा ….!
नही मिल पाते
जीवन भर,
उनके,
मनोभाव,
रहता बहुधा,
मनमुटाव….!!
नहीं बनपाती
समरसता,
सहजभाव,
सर्वज्ञ है जो,
फिर क्यों,
सास-बहु का,
रिश्ता,
बदनाम होता है
आखिर……
ऐसा क्यों होता है ???

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डी. के. निवातियाँ

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