महबूब की गली से जो होकर गुजर गया

महबूब की गली से जो होकर गुजर गया
बस इसी बात का अफसाना हो गया।
पल भर को उठा के निगाहें जो देख लिया उसकेा
दुष्मन हमारे प्यार को सारा जमाना हो गया।

पैगामे दिल यार तक पहॅूचाया भी नहीं
कि खत आॅसूओं का सबने पढकर सुना दिया
मेरी मजबूरी! उफ रो भी नहीं सकता
सौदागार इन आॅसूओं का अब जमाना हो गया।

दिले आरजू को मेै दबा भी लेता
निगाहें उल्फत मै छिपा भी लेता
ये क्या जिके्र वफा में उसका नाम
हर प्यासे लब का पैगामा हो गया।

सच पूछो तो उसका मेरा कोई रिष्ता नहीं
मुद्धत हुई हम राह बदल चुके है
फिर जमाने को क्या, क्यों ये कहता है
नादां वेवफा के प्यार में दीवाना हो गया।

मेरे प्यार की कद्र क्या करेगा जमानामहबूब की गली से जो होकर गुजर गया
बस इसी बात का अफसाना हो गया।
पल भर को उठा के निगाहें जो देख लिया उसकेा
दुष्मन हमारे प्यार को सारा जमाना हो गया।

पैगामे दिल यार तक पहॅूचाया भी नहीं
कि खत आॅसूओं का सबने पढकर सुना दिया
मेरी मजबूरी! उफ रो भी नहीं सकता
सौदागार इन आॅसूओं का अब जमाना हो गया।
मेरे दिल के जख्म क्या भरेगा जमाना
पत्थरों की बस देता रहा सौगाते
ये कह के कि कैस दीवाना हो गया।
महबूब…..

Leave a Reply