हत्याचार

स्याही की जगह खून उगला उनकी कलमो ने ,
पाप का ऐसा मजंर दिखा गये ,
वो पापी थे पाप की आँधी चला गये ।
मासूम से बच्चो की लाशे बिछा गये ,
घर से निकले थे जो पाने शिक्षा का ज्ञान ,
मदरसे मे जाकर मौत के आँचल मे समा गये ।
बेरहम दरिंदे मानवता पर कैसा खजंर चला गये ,
इंसान ही इंसान को दानव का रूप दिखा गये ,
विध्वंस का भयंकर तांडव मचा गये ।
जूल्मी ,
मानव को नही मानवता को मार गये ,
दरिंदगी से मासूम बच्चो को सहांर गये ।
अब देना उनको जवाब करारा है,
बताना है उनको कि,
अब मरने का वक्त तुम्हारा है ।

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