।।गजल।।खुद को रोका हूँ।।

।।खुद को रोका हूँ।।ग़ज़ल।।

खुद को रोका हूँ ,खुद ही,खुद को आजमाने के लिए ।।
खुद को कैसे मिटा दू तुम्हे पाने के लिए ।।1।।

वक्त काफी है और फ़ासला भी मिटा बैठे है ।।
पर एक बहाना तो चाहिए करीब आने के लिए ।।2।।

इल्म तुझ पर है पर पर तेरे दिल के इरादों का क्या ।।
वफाई तो चाहिए दिल में बसाने के लिए ।।3।।

ये झुकी नजर और खामोश इशारो से क्या समझे ।।
इक पल की अदा तो चाहिए मुस्कराने के लिए ।।4।।

तुम्हे भी मालूम है मेरा नजरअंदाज करना ।।
पर मेरा इरादा नही है तेरा दिल दुखाने के लिए ।।5।।

कल के तुम ही मुझ पर इल्जाम लगा बैठोगे ।।
जब दर्द ही रह जायेगा साथ निभाने के लिए ।।6।।।

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  1. vaibhavk dubey vaibhavk dubey 14/01/2015

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