जहाँ दुनिया ने एक मेला सा रखा है

चाँदनी रात में उनके लिए पैमाना बना रखा है,
लेकिन उन्होने हाथ में खंजर को छुपा रखा है।

ईश्क के मैदान में जो जीता न हो कभी,
इंसान ने उनके लिए मैखाना बना रखा है।

दौलत की खातिर बेचते ईमान यहाँ सब,
हमने उसी फिराक से खुद को बचा रखा है।

भारत को देखना हो तो फुटपाथ पे आओ.
महलों में तो लोगो ने परदा लगा रखा है।

हर रोज कत्लेआम और मज़हब की लड़ाई,
नापाक हरकतों को जेहाद बना रखा है।

तेरा वजूद वही है क्यूं खो गया ‘मोहित’,
जहाँ दुनिया ने एक मेला सा रखा है।