कागज पर तो मैंने कई अशआर लिखे है.

दूसरों को उसने प्रेम के इजहार लिखे हैं,
मुझको तो बेरुखी के खत हजार लिखे हैं.

होती है तेरे खत से तो उम्मीद फूल की,
तूने तो जवाबों में मगर खार लिखे हैं.

तेरी तस्वीर इस गज़ल में उतरती चली गई,
कुछ इस तरह ये शेर मेरे यार लिखे हैं.

मुहब्बत के दो लफ्ज जुबानी नही निकले,
कागज पर तो मैंने कई अशआर लिखे है.

मंजिल पे पहुंचने का माद्दा तो है मगर,
किस्मत में ठोकरों के तो अम्बार लिखे हैं.

वक्त कभी भर नही पाया मेरे घाव,
दामन में मेरे जख्म बेशुमार लिखे हैं.

हर शख्स की आंख में चुभने लगा ‘मोहित’,
बुलन्दी पे पहुंचने के अब आसार लिखे हैं..

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