।।रिश्ते।। कविता ।।

।।रिश्ते।।

जब हमको देना पड़ जाये
रिस्तो का साबूत
जब हृदय को लगे सताने
सम्बंधो का भूत
खुद से डर के
आहे भर के
मत सहना अन्याय ।।
तुमको ही है करना न्याय ।। 1।।

जब झूठ और सच के मन्थन में
न निकले कुछ निर्णय
दो रहो पर मन फ़स जाये
कुछ बोल न पाये हृदय
मत डर ऐसें
दुनिया पैसे
लालच के अध्याय ।।
तुमको ही है करना न्याय ।। 2।।

जब तेरी गलती बन जाये
चर्चाओ की जाल
झूठी मूठी प्रसंशा के
जब हो पुल तैयार
रुको वहा पर
सोचो उन पर
दुःख के है पर्याय ।।
तुमको ही है करना न्याय ।।3।।

जब करो दोस्ती, प्यार करो
या साथ करो तुम आगे
अजमाना मत इन रिस्तो को
ये है कच्चे धागे
होगी मुश्किल
मत तोड़ो दिल
बन्द करो व्यवशाय ।।
तुमको ही है करना न्याय ।। 4।।

जब आँखों को लगे गलत कुछ
और हृदय न माने
उस रिश्ते से दूर रहो तुम
जाने या अनजाने
आहत न हो
कोई हृदय
अपनपन भी टूट न जाय ।।
तुमको ही है करना न्याय।।5।।

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