परिवर्तन की बयार

परिवर्तन की बयार
कहते सब है करने को कोई तैयार नही ,
बाते करना परिवर्तन का कोई हथियार नही ।
बदलाव के लिये ए जमाने तुझे उठना होगा ,
शर्म शकां को दूर रखना होगा ।
अपने बारे मे सोचकर जिदंगी गुजार दी ,
अब दुसरो के बारे मे सोचना होगा ।
तेरे इस सहयोग से ,
इस जमाने का बहुत भला होगा ,
कब तक सोये रहोगे तुम सुबह के इतंजार मे ,
उजाला तो तेरे किये आव्हान से होगा ।
बदलनी होगी तुझे सुरत जमाने की ,
अब बारी है दुनिया को जगाने की ।
दुनिया मे बुराई के बादल इतने घने है ,कि
अच्छाई का सुरज उन्हे भेद नही सकता ,
हे युवा तेरे सिवा ये काम कोई और कर नही सकता ।
अपनी जवानी को दुनिया की भलाई मे लगा दे ,
उम्मीदो के आसमान पर एक चाॅंद और उगा दे ।।।।।।।।

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