मजबूर ममता

कातां और मोहन थे दो दपंती ,
कुछ ज्यादा नही थी उनकी सपंती ।
एक था बेटा बङा दुलारा ,
जिसके खातिर अपनी हर इच्छा को मारा ।
मोहन ने उसका हर अरमान पूरा किया ,
कातां ने अपनी सारी ममता को उस पर लुटा दिया ।
खुद भूखी रहती पर उसे खाने को पकवान देती ,
उसकी हर गलती को बचपना कहकर नकार देती ।
वो नालायक बूरी सगंति मे पङ गया ,
उसके दोस्तो ने उसे बहुत बिगाङ दिया ।
नशे के दलदल मे उसको धकेल दिया ,
और कातां के लाडले को नशेङी बना दिया ।
पिता ने उसे बहुत समझाया ,
मां ने उसे फिर भी गले से लगाया ।
उसकी नशे की लत ने घर का सारा सामान बिकवा दिया ,
और पिता की तस्वीर पर हार लटका दिया ।
पर ममता की कोई सीमा नही होती ,,,
एक दिन वो नालायक नशे के लिये तङप रहा था ,
बेशर्म ,अपनी विधवा मां से नशे के लिये पैैसे मांग रहा था ।
कातां ने उसे अपनी मजबूरी बतायी ,
खोल कर खाली तिजोरी दिखायी ।
उस नासमझ ने गुस्से मे आकर कातां पर हाथ उठा दिया ,
उस पागल ने ममता पर एक कहर और ढा दिया ।
नशे की जरूरत के कारण वो चल भी नही पाया ,
उसकी इस हालत ने कातां का दिल बहुत दुखाया ।
कातां घर के बाहर गयी,थोङी देर मे वापिस आयी ,
अपने साथ वो नशे की पुङिया भी लायी ।
पुङिया कैसे आयी, बता रही थी मां की सूनी कलाई ।
बेटे के खातिर वो अपने सुहाग की एकमात्र निशानी भी बेच आयी ।

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