समय चक्र

कठिन थाह पाना जीवन की,
समय निरन्तर चलता है,
शाख़ एक यदि टूट गई तो,
नव पल्लव भी खिलता है.||

लहर एक उठ कर सागर से,
फिर सागर में मिल जाती,
विरह मिलन का खेल निरंतर,
समय चक्र में पलता है.||

रवि प्रकाशमय अपने पीछे
अंधकार दे कर जाता,
फिर प्रकाश होगा उज्जवल
यह कह कर चंदा ढलता है||

नदी न रुकती, समय न रुकता
जीवन कभी नही रुकता,
थमा हुआ जीवन पोखर के
जल की भांति सड़ता है ||

काल समय है, समय पकड़ना
मुट्ठी में जल जैसा है,
सृष्टि हुई तो विलय भी होगा
नियम सदा यह पलता है ||

योगेंद्र टिक्कू

Leave a Reply