जिसे चाहा !

कोमल सा नाजुक दिल में,
तन्हाई की खंजर चुभा है।
यादो की गहरी समुन्दर में,
मेरा दिल डूबा है।

वो तितली दूर उड़ चली,
दिल की उपवन उजड़ा है।
न मधु-माह न सावन,
ज़िन्दगी की हर दिन रुखा है।

चाहत की चाँद डूब गई,
खुशिया ज़िन्दगी से छूमंतर है
प्यार की शमा बुझ गई,
ज़िन्दगी मेरा अँधेरा है।

इश्क की महल ढह गई,
जहा सारा मेरा खंडहर है।
सफर ज़िंदगी की कठिन हुआ,
अब हर राह जर्जर है।

उम्मीद की शाम ढल गई,
आँखे सुबह शाम तर है।
जिसे चाहा,दिल से पूजा,
वो किसी गैर का है।

बावरा मन मेरा आवारा है
सुना जहा मेरा सारा है।
सोच के हैरा हु मै,
ऐसी ज़िन्दगी का नज़ारा है।

@@ दुष्यंत पटेल @@

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