कलम

मेरा वजूद इस कलम से है
मेरा मकसूद इस कलम से है।।

चश्म-ए-तर कर देती है हर आँख
न जाने क्या बात इस कलम में है।।

सुना है ‘श्रवण’ तेरी गैर मौजूदगी में भी
तेरे मौजूद होने का एहसास इस कलम में है।।

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  1. Sukhmangal Singh Sukhmangal Singh 11/01/2015

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