घाव गहरे हैं -गजल–शिवचरण दास

घाव गहरे हैं मरहम रखो
रोक लो अश्क पलक नम रखो.

दर्द खुद ही घटता जायेगा
मन मे जरा सा अगर दम रखो.

अलग अलग नींद और सपने हैं
टूट जाये ना कहीं आख बन्द रखो.

टूट कर जुडता नही दुबारा कभी
पत्थरों से दूर ही जरा दर्पण रखो.

कट कर पडी खेत मे फसल अपनी
जरा अब बादलों पर नजर रखो.

जब हवाएं आन्धियां बन जाये तो
आप अपनी शमा को बचाकर रखो.

देख कर जिसको खुशी मिलती हो
एसे दोस्त को हमेशा संग रखो.

है अजब रीत दुनिया की ए दास
आंखे खोल कर जुबां बन्द रखो.

शिवचरण दास

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