सिलसिला

सिलसिला

रघुकुल रीति सदा चली आई का चलन आज भी जारी है !
कुछ सामाजिक कुरीतियों का सिलसिला आज भी जारी है !!

रखते है भगवान को जेब से लेकर चप्पलो तक में !
गुजरते वक्त मंदिर के आगे शीश नवाना जारी है !!

मात – पिता की आज्ञा मंजूर किसे आज जमाने में !
पर दूर से ही चरण स्पर्श का दिखावा अभी बाकी है !!

दुनिया को सिखाते पाठ गीता का है “कर्म ही पूजा” !
पर पत्थर पूजा करने की हमे आज भी बीमारी है !!

विज्ञान में तो हमने छू लिया अब चाँद और मंगल भी !
पर भूत प्रेतों से डरने का सिलसिला आज भी जारी है !!

बड़े शौक से अपनाये सभी चाल-चलन विदेशी हमने !
पर संस्कारी दिखाने का ढकोसला आज भी जारी है !!

घर में बुजुर्ग तरसते एकपल अपनेपन के लिए आज भी !
पर फेसबुक,ट्वीटर,व्हाट्सअप्प अपडेट करना जरुरी है !!

जिनको कोसते, मरने की बद्दुआ देते दिन में हजार बार !
उनकी बरसी में भोज लगाने का अभी सिलसिला जारी है !!

देते है जो नसीहत दुसरो को ईमानदारी की बड़प्पन के साथ !
उनका लिए रिश्वत से काम निकलवाना बड़ी समझदारी है !!

वैसे तो डर लगता है हर किसी को गुलाल लगाने से !
पर होली में कीचड से नहलाने का चलन अभी बाकी है !!

तोड़ संयुक्त परिवार तो बना लिए सम्बन्ध सबने एकांकी !
पर दीवाली को दिखावे की रंगोली सजाना आज भी जारी है !!

दिलो में तो बसी नफरत, आँखों बेस में खून के अंगारे है !
वैसे ईद पे ख़ुशी से गले मिलने का दस्तूत आज भी जारी है !!

तोड़ निगम यातायात में हम जान दावँ पर लागते हर रोज़ !
बिल्ली के रास्ता काटने पर रुकने का भ्रम आज भी जारी है !!

समय कँहा किसी के पास रफ़्तार की इस जिंदगी मैं !
मगर एक छींक का असर आज भी, वक़्त पे हावी है !!

पूजा करते देवी की नवरात्र करना बनी शान हमारी है !
पर कन्या भूर्ण-हत्या का सिलसिला आज भी जारी है !!

डी. के. निवातियाँ_____@@@

2 Comments

  1. rakesh 16/01/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/03/2015

Leave a Reply