पागल

हम तो दिवाने थे
पागल तो दुनिया ने बताया
क्या करते तेरी एक झलक ने
मुझको इतना था बेबस बनाया ।

न राहों की खबर थी, न मंजिल का पता था
मगर न जाने इस दिल को क्या हुआ था
संभलना जरा, लोगों ने भी ये कहा था
मगर तेरी नजरों का ऐसा नशा था
दो पल का भी साथ तेरा, मुझे लगता बड़ा था ।

न चाहा था फिर भी कदम मेरे बढ़ गए
न सोचा था फिर भी न जाने क्यों तुमसे सब कह गए
बीच राहों में ही छोड़, फिर न जाने तुम किधर गए
पलकों ने भुला भी नहीं था, इतनी जल्दी क्यों तुम बदल गए ?

अंधेरे कमरे में अकेले थे रहते
न हाल दुसरों ने पुछा, न हम ही कुछ कहते
गम के दीपक जलाके ख़ुद में ही गुम रहते
तेरी याद में यूँही आंसू थे बहते ।

खता भी मेरी थी
जो तुझे इतना चाहा
हम तो दिवाने थे
पागल तो तुमने था बनाया ।

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