रूह

फिर रूह को आज तेरा एहसास हुआ है
तेरी य़ादों की तूफा में खुद को बरबाद किया है ।

तेरी आँखों से बूंद भी गिरने देता नहीं
तेरे होठों से हँसी को जुदा होने देता नहीं
तेरे चेहरे को दिल में चाँद सा सजाया था
बिना सोचे ही तुझसे क्यों एतबार हुआ था ?

फिर रूह को आज तेरा एहसास हुआ है
तेरी गुशताखियों के बावजुद क्यों तुझसे झतना प्यार किया है ?

तेरे साये से साया भी मिलाया था हमने
तेरी धड़कन को दिल में समाया था हमने
तेरी मुहब्बत में खुद को आजमाया था हमने
फिर बिना खता क्यों हमसे झतना रुढ गए तुम ।

फिर रूह को आज तेरा एहसास हुआ है
तेरे जाने के बाद खुद को खोने का एहसास हुआ है ।

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