रिश्तोंकी नीव

रिश्तोंकी नीव

माँ-बाप का प्यार
बंटता अपनी औलादोंमे
भाई-भाई के प्यार
छूटता जायदाद के पास
दीदी-बहन का प्यार
साथ देते जीवनभर
रिश्ते निभातें पराया घर
भरोसें टूटता अपनें आप
स्वार्थनें जब शीश उठाते |

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