प्राण का पक्षी निकल जाये

“ जब तन के घोंसले से
प्राण का पक्षी निकल जाये
तो वह अंत नहीं है
उसका तात्पर्य है सुबह हो गयी
और वो तो केवल न जाने किस
संसार की सैर पर उड़ गया ”

नीरज सारंग

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