भारत का तिरंगा

ऐसा है मेरा झण्डा,
जो गीत ख़ुशी के गाए।
भारत के तिरंगे को ,
कोई ना झुका पाए।।
ये शान है हमारी,
वीरों का बलिदान हैं।
ये देश का है सारथी,
हमारा अभिमान हैं।।
उड़ता रहे गगन में,
चहुँऔर ये लहराए।
भारत के तिरंगे को,
कोई ना झुका पाए।।
मजहब पे लड़ने वालों,
सुन लो ये कान खोल के।
लेंगे इसका बदला,
अपना लहू ये तोल के।।
ये भारती की शान हैं,
कोई ना आँच आए।
भारत के तिरंगे को ,
कोई ना झुका पाए।।
हम शख्श है ऐसे,
शेरों के संग रहते।
राणा की संतान है,
भारत को माता कहते।।
इतिहास कारगिल का,
क्या फिर से दोहराए।
भारत के तिरंगे को,
कोई ना झुका पाए।।
“अनमोल”क्या है रूतबा,
यह पूछ लो जहाँ से।
ऐसा वतन नहीं हैं,
इस जमीनों-आसमाँ पे।।
वन्देमातरम् जहाँ,
कण-कण में गुँजाए।
भारत के तिरंगे को ,
कोई ना झुका पाए।।
(वन्दे मातरम जय हिन्द)
कवि :-अनमोल तिवारी कान्हा
कपासन जिला-चित्तौडगढ(राज•)