वो आंखों से तेरी पहली मुलाकात का सफर

वो आंखों से तेरी पहली मुलाकात का सफर,
बहुत मंहगा पडा मुझे ये ख्यालात का सफर,

तुझे पाया या खो दिया,इसका अंदाजा नहीं है,
अजीब होता है थोड़ा सा इस हयात का सफर,

मेरी आँखों में आंसू थे और वो कहता था पानी है,
तमाम उम्र ऐसे ही चला ज़जबात का सफर,

हमारे रास्ते अलग,हमारी मंजिलें कुछ और,
समझ मुझे नहीं आया ऐसे हालात का सफर।

चलना मुझे अब तो किसी सज़ा सा लगता है,
बहुत अच्छा कटा था मेरा वो शुरूआत का सफर।

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