“मेरा बचपन “

रवानी सुनाऊँ वा ,जवानी सुनाऊँ|
आज अपने बचपन,की कहानी सुनाऊँ||
वर्ष चार हमने, को नीर ज्यों नापा|
कहाँ तक उसकी ,दीवानी सुनाऊँ||
थीं हाथ में पुस्तक ,तैरती थी काया !
पतवार बनकर,कत कहानी सुनाऊँ ||
उ नदी की तलहटी,उफनता रहा पानी !
चढ़ी न जवानी , की कहानी सुनाऊँ ||
थी पढ़ने की ललक,औ चलने को पौरुष!
बचपन की रवानी ,की कहानी सुनाऊँ || 

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