सपने सजाकर देखिये-गजल-शिवचरण दास

आप अपने आप को अपना बनाकर देखिये
जिन्दगी वरदान है सपने सजाकर देखिये .

जब इरादे नेक हों काम कुछ मुश्किल नहीं
होंसले के साथ कुछ हिम्मत जुटाकर देखिये.

पत्थरों की पीठ को रस्सियां घिस जायेगीं
कोई भी छोटा नहीं है सर उठाकर देखिये.

हर कोई अतीत की ही कब्र पर सोता रहा
आज के संगीत पर भी गुनगुनाकर देखिये.

नफरतों की धुन्ध में हैं आस्थाएं चूर चूर
नेह की धरती में कुछ रिश्ते उगाकर देखिये.

मन्दिरों या मस्जिदों का फासला कुछ भी नहीं
बस दिलों के फासले को अब मिटाकर देखिये.

दोस्तों की शकल में ही दुशमनों की भीड है
वक्त आने पर जरा तो आजमाकर देखिये.

आप की नाजुक हथेली स्वयं ही रच जायेगी
प्यार की मेहन्दी जरा सी तो लगाकर देखिये.

शिवचरण दास

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