मुकद्दर (मुक्तक)

मुकद्दर (मुक्तक)

हमने तो अपने दिल में तेरा आशियाना बना डाला
अपनी निंद्रा में भी, तेरे ख्वाबो का जहां बसा डाला
मत माँगना हिसाब मुहब्बत का कैसे समझा पाएंगे
की हमने तो तेरी खता को अपना मुकद्दर बना डाला

@___________________डी. के. निवातियाँ

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