कौन है (मुक्तक)

कौन है (मुक्तक)

पहरा लगा के रखना इस दिल के दरवाजे पर
सुना तेरे शहर में रहते नजरो के कातिल बहुत है
जिस दिन से बसेरा किया तुमने हमारे दिल में
तब से बार-बार, दस्तक देता बहार से कौन है

@___________________डी. के. निवातियाँ

2 Comments

  1. यतेन्द्र सिंह 03/01/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/03/2015

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